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Friday, April 3, 2009

क्या करें इनका..

रिश्ते
अनगिनत
अनकहे
कुछ बूझे से
कुछ अ-बूझे से
रिश्ते होते ही ऐसे हैं।
कुछ रिश्ते ऐसे
जो न याद रह सकें
न भूलें जा सकें
जो न कैद हों सकें
न मुक्त कर सकें ,
ये जो मेरा तुम्हारा रिश्ता है
वो भी ऐसा ही है ,,
आसमान पे रोज़ उगते चाँद की तरह
जो न मुट्ठी में आए
न आंखों से दूर जाए
हर अमावस पे सिमट जाए
हर पूनो पे उभर आए .
रिश्ते होते ही ऐसे हैं
जो न याद रह सकें......